refrigeration cycle

Refrigeration Cycle: HVAC Equipment कैसे काम करते हैं?

Refrigeration Cycle HVAC equipment के काम में करने का सिद्धांत है। Refrigeration Cycle मुख्यतः चार components से मिलकर बना होता है। जिसके बारे में हम आगे के भाग में पढ़ेंगे।

जब हमें गर्मी लगती है तो हम क्या करते हैं? हम घर का fan चालू करते हैं। जिन लोगों के पास Air Conditioner की व्यवस्था होती है वो अपना AC चालू करते हैं। हमें ठंडा पानी पीना होता है तो हम refrigerator से पानी लेकर पीते हैं।

आखिर ये AC, ये fridge ऐसा क्या करते हैं जो इतनी ठंडक देते हैं? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमें इसका सिद्धांत जानना होगा। AC और fridge दोनों Equipment, Refrigeration Cycle पर कार्य करते हैं।

Refrigeration Cycle जानने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बिंदु

Refrigeration Cycle के बारे में और आगे जाने से पहले हमें ये चार key concepts जानने होंगे।

Heat of Vaporization (वाष्पन की ऊष्मा)

हम सभी जानते है कि जल का Boiling Point 100 ‘C होता है। इसी तापमान पर जल वाष्प के रूप में भी बदल जाता है। कहने का तात्पर्य ये है कि 100 ‘C पर जल, liquid और gas दोनों रूप में रहता है।

और हम ये भी जानते है कि जल का तापमान 100 ‘C से ज़्यादा नहीं बढ़ सकता। ऐसे में 100 ‘C के जल को और Heat देने पर उसका temperature बढ़ने के बजाय वो अपना अवस्था बदल कर भाप में बदल जाता है।

Heat की वह मात्रा जो 100 ‘C के जल को वाष्प में बदल दे उसे Heat of Vaporization कहते हैं। HVAC में, जब एक liquid, gas में convert होता है तो इस प्रक्रिया को evaporation कहते हैं। इसके विपरीत जब gas, liquid में convert होता है तो इस प्रक्रिया को condensation कहते हैं।

चाहे Condensation हो या Evaporation, दोनों प्रक्रियाओं में कुछ न कुछ मात्रा में ऊर्जा की आश्यकता होती है।

Pressure Changes the Boiling Point of a Liquid (Pressure, Liquid के boiling point को बदल देता है। )

Also Read – Refrigerator Purchase Guide in 2020

Lower pressures पर liquid आसानी से और जल्दी उबलने लगते हैं जबकि Higher pressures पर liquid देर से उबलते हैं। जल का ही उदहारण लेकर चलते हैं —

Sea Level पर जल 100 ‘C पर उबलता है। जबकि Rockies पर्वत (जहाँ pressure sea level से कम होता है) पर 90 ‘C पर ही उबलने लगता है। ये pressure difference जल के उबलने को और आसान बना देता है।

इसी प्रकार refrigerant के दाब में परिवर्तन करके उसके boiling point को भी बदला जा सकता है। ये प्रक्रिया refrigeration cycle में बहुत ही मत्वपूर्ण role play करता है।

Heat न तो उत्पन्न किया जाता है और न ही नष्ट – इसे सिर्फ transfer किया जा सकता है

इसे समझने के लिए हम एक कप चाय का उदाहरण लेते हैं।

हम एक कप चाय लेते है जिसका तापमान 250 डिग्री है। अब इसमें 50 डिग्री तापमान वाली बर्फ डालते हैं। अभी हमारे पास चाय की मात्रा ज़्यादा हो गयी है परन्तु इसका तापमान 150 डिग्री हो गया है जो कि दोनों वस्तुओं के तापमान का मध्य बिंदु है।

Cold नाम की कोई चीज़ नहीं होती – ये महज़ Absence of Heat है।

जब कोई air conditioner या refrigerator किसी स्थान को ठंडा करते हैं तो इसका मतलब ये नहीं होता कि वो उस स्थान में cold air छोड़ते हैं।

जबकि refrigeration cycle का main purpose किसी निश्चित स्थान से heat निकाल कर बाहर करना होता है। काम heat मतलब ठण्डा कमरा।

Heat Transfer Methods

जैसे हमने ऊपर पढ़ा कि heat को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट। इसे सिर्फ एक वस्तु से दूसरी वस्तु में transfer किया जा सकता है।

ये transfer, higher temperature से lower temperature की ओर होता है। और heat transfer के 3 methods हमने अपनी साइंस की किताब में पढ़ा है।

  1. Conduction ( संचालन )
  2. Convention ( संवहन )
  3. Radiation ( विकिरण )

Conduction ( संचालन )

इस विधि में heat transfer solid surface से होता है।

Convention ( संवहन )

इस विधि में heat transfer, liquid या gas माध्यम से होता है।

Radiation ( विकिरण )

इस विधि में heat transfer के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।


Components of Refrigeration Cycle

अब हम बात करते हैं refrigeration cycle की। कैसे Refrigeration Cycle HVAC system में काम करता है।

यहाँ पर एक बात और है जो ध्यान देने लायक है वो ये है कि चाहे हम छोटे से refrigerator की बात करें या कोल्ड स्टोरेज के chiller की, ये refrigeration cycle सबके लिए एक ही सिद्धांत पे काम करता है।

सामान्यता Refrigeration Cycle चार मुख्य भागों से मिल कर बना होता है।

  1. Compressor
  2. Condenser
  3. Expansion Valve
  4. Evaporator

ये चारों components एक Piping System के द्वारा एक दूसरे से जुड़ा रहता है। इस प्रकार refrigerant एक air tight system में पड़ा रहता है और निकल नहीं पाता।

Refrigeration Cycle की शुरुआत में refrigerant ठंडी वाष्प के रूप में रहता है और compressor की तरफ जाता है।

The Compressor

Refrigeration cycle के सबसे अहम भाग को इसका इंजन या heart भी कहा जाता है। ये किसी भी refrigeration system में सबसे ज्यादा power consume करता है। और refrigerant को पुरे system में पहुँचाने का काम करता है।

जैसा नाम से ही पता चलता है, Compressor Refrigerant को compress करता है। इस compression की प्रक्रिया के वजह से ठन्डे और low pressure refrigerant का pressure काफी बढ़ जाता है

फलस्वरूप उसका temperature भी बढ़ जाता है।

Compression के बाद ये गर्म और High Pressure refrigerant refrigeration cycle के next component में पहुँचता है। जो कि Condenser होता है।

Condenser

Condenser का काम compressor से आयी हुई गर्म refrigerant को ठंडा करना होता है। इस प्रक्रिया में refrigerant इतना ठंडा हो जाता है कि वो gas अवस्था से liquid में convert हो जाता है। इस प्रक्रिया को condensation कहते हैं।

बाहरी वातावरण का तापमान refrigerant के तापमान से काफी काम होता है। और condenser बाहरी वातावरण के सम्पर्क में रहता है।

फलस्वरूप refrigerant की high temperature heat atmosphere की low temperature heat की तरफ flow होती है।

Refrigerant का surface area बढ़ाने के लिए condenser को coil के रूप में बनाया जाता है जिससे उसका piping surface area बढ़ जाता है।

यहाँ एक बात ध्यान देने वाली है कि refrigerant का pressure कम नहीं होता। अब ये गर्म और high pressure liquid expansion device में जाता है।

Expansion Device

Expansion device का काम होता है high-pressure liquid refrigerant का pressure कम करना। जिससे वो आसानी से evaporate हो सके। (जैसा हमने पहले पढ़ा कि low pressure liquid को evaporate करना ज़्यादा आसान है)

Refrigerant का pressure अचानक से कम हो जाने के कारण refrigerant एक low pressure और low temperature liquid और gas का मिश्रण बन जाता है। अब ये ठंडा liquid और gas का मिश्रण cycle के evaporator में जाता है।

Evaporator

Evaporator low pressure और low temperature liquid और gas का मिश्रण input के रूप में जाता है। यहाँ पर refrigerant का तापमान रूम के तापमान से काफी कम होता है।

जिस वजह से रूम की अपेक्षाकृत गर्म heat evaporator की तरफ transfer होती है। फलस्वरूप आसपास का area ठन्डे refrigerant के प्रभाव से ठंडा हो जाता है।

Condenser की तरह ही evaporator एक heat exchanging device है। इसलिए इसकी भी बनावट बिलकुल condenser की तरह ही coil के रूप में होती है जिससे इसके अंदर मौजूद refrigerant को एक बड़ा surface मिल सके।

Low pressure liquid refrigerant यहाँ पर आसपास की heat से ही boil होने लगता है और भाप में बदल जाता है। अब ये भाप refrigeration cycle के engine यानि compressor की तरफ बढ़ता है।

यही cycle पूरी प्रक्रिया में चलती रहती है। और हमें फलस्वरूप ठंडा रूम, ठंडा पानी और fresh food material मिलता है।

इस प्रकार आज आप लोगों ने Refrigeration System का सिद्धांत देखा।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *